दिया

दिया

R
Ritesh Burnwal
Connecting to Wreadom...

About this book

पश्चिम की तरफ आसमान का रंग अब तांबे जैसा होने लगा था। राजधानी के निचले हिस्से, यानी कुम्हार टोली और जुलाहों की बस्ती में धुआं उठने लगा था। दिन भर भट्ठियों में पकने वाले मिट्टी के बर्तनों की गंध अब शाम के खाने के लिए जलने वाली सूखी लकड़ियों के धुएं में मिल रही...